'कितना आसान है...!'
कितना आसान है... दूसरों पर पीछे हँस देना,
कितना मुश्किल है हँसी की इक वजह बनना!
जो बस मस्ती के आलम में दिन-रात रहते हैं,
कितना मुश्किल है उन्हें हकीकत से मिलाना!
कितना आसान है झूठे किस्सों को गढ़़ लेना,
कितना मुश्किल है सच को बयान कर पाना!
भूल जाते है गहरे जख़्म देनेवाले अक्सर,
कितना मुश्किल है जख़्मों का मलहम बनना!
कितना आसान है
क्रमशः
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