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'बेटी दिल का एक कोना'

*'बेटी दिल का एक कोना'* इतना आसान कहाँ इस दुनिया में तनया होना, बारहा रिक्त रह जाए बेटी दिल का एक कोना! कभी रिश्तों की ओट में तो कभी समाज के नाम, ख़्वाहिशों को ताक पर टाँग दें हर बेटी अभिराम। आसान कहाँ है यारों बेटी-सा त्याग कर पाना, परिणय सुत्र में बंधकर पीहर से विदा हो जाना! सच होने से पहले ही सपने को हृदय में सुलाना, स्पर्श नहीं कर पाए कोई बेटी दिल का वह कोना। प्रेम, स्नेह के संग-संग नित नई नसीहत ओढ़, कितनी बार बढ़े बेटी दोराहे निज इच्छा छोड़।  अपनों की ख़ातिर स्वाधिकारों को अर्पण करना, बिन तिल और चावल ही बेटी का तर्पण करना। आँखों से बहता उसके तपकर पिघलता सोना, बंद तिजोरी-सा रहता बेटी दिल का एक कोना। श्रीमती माधुरी मिश्रा 'मधु'  नागपुर, महाराष्ट्र 🙏🙏🙏

प्यारी बहना... 💖

प्यारी बहना... 💖👭👭 हाँ, थोड़ी सख्त 'दी' हूँ मैं... पर दिल में नमीं रखती हूँ। आँखों से डराती रही सदा, पर पलकों पर तुम्हें बिठाती हूँ। हाँ, थोड़ी सख्त ही रही मैं... तुम्हें हर ताप से जो बचाना था। जमीं पर तुम्हारे दायरे बाँधती रही क्योंकि हर उड़ान ऊँची बनानी थी। हाँ, थोड़ी सख्त हूँ अब भी मैं... समय की बर्बादी मुझे पसंद नहीं। देखना चाहती हूँ तुम्हारे ख़्वाब हकीकत बनते, कि अब भी तुमपर पैनी नज़र रखती हूँ। हाँ, थोड़ी सख्त ही रहूँगी मैं... वट-वृक्ष-सी फैली तुम्हारे सिर पर सदा। जलाती धूप को छान शीतलता पहुँचाती, अपनी शाखाओं से निकली जड़ों संग तुम्हें छूती भी रहूँगी। हाँ, मैं सदा सख्त ही रहना चाहती हूँ... कि मेरी सख्ती में तुम्हारा हित है बहना। श्रीमती माधुरी मिश्रा 'मधु' 09/05/21 मेरी छोटी बहनों को मातृदिवस की ढेर सारी बधाइयाँ एवं शुभकामनाएँ। 🙏🙏🙏