'गणतंत्र दिवस'
दिनांक :- 26/01/22
दिन-विशेष :- गणतंत्र दिवस
विधा :- कविता
विषय :- 'गणतंत्र दिवस'
हँसते-हँसाते खुशियाँ लुटाते 'गणतंत्र दिवस' है आया,
कोरोना की हर लहर को भूल मेरा हिंददेश मुस्काया।
तिहत्तरवीं वर्षगाँठ अबकी चहुँ ओर आनंद है छाया,
सावधानी बरत सुरक्षित हुई जनता का हृदय हर्षाया।
माना कि बीमारी बहुत बड़ी फिर भी मानस न भूला,
गम की बदली से झाँक रहा उम्मीद का नया सवेरा।
प्रजातंत्र है देश में अपने मताधिकार वयस्कों ने पाया,
अधिकार, सुरक्षा, जिम्मेदारी संग हिंदुस्तान की बदली काया।
जाति-धर्म और भेद-भाव सज्जनों ने सबकुछ बिसराया,
संविधान के अनुच्छेदों संग समानाधिकार सभी ने पाया।
हँसते-हँसाते खुशियाँ लुटाते गणतंत्र दिवस है आया,
कोरोना की हर लहर को भूल मेरा हिंददेश मुस्काया।
द्वारा :-
श्रीमती माधुरी मिश्रा 'मधु'
नागपुर, महाराष्ट्र
अद्भुत 👌👌🙏🙏
ReplyDeleteTysm Tushar ji...☺🙏💐
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