'ज़िंदगी'
'ज़िंदगी'
कभी मजबूरी तो कभी तीज है ज़िंदगी।
रेगिस्तानी रेत में पानी-सा छलावा है ज़िंदगी,
कभी दर्द बेइंतिहा तो कभी मुस्कान है ज़िंदगी।
सपनों से मन बहलाती आशाएँ जगाती ज़िंदगी,
कभी शीशमहल की तरहा बिखर जाती ज़िंदगी।
आँखों में आँसू सजा लबों को हँसाती है ज़िंदगी,
कभी सुलझी लच्छी कभी गाँठ बन जाती ज़िंदगी।
इक जीवन को कितने रंगों से सजाती है ज़िंदगी,
कभी सौतन कभी सहेली 'मधु' बन जाती ज़िंदगी।
श्रीमती माधुरी मिश्रा 'मधु'
नागपुर, महाराष्ट्र
Tysm...☺🙏💐
ReplyDeleteAmazing 👌👌
ReplyDelete☺🙏💐
Delete