वक्त...

खुशामद करो या इबादत कर लो,

वक्त अपनी फितरत बदलेगा नहीं।


ये हर सबक तुम्हें सिखाएगा बशर्त,

जब तलक अपनी गलती मानोगे नहीं।


कसौटियों पर कसेगा कभी ढील भी देगा,

तुम्हें तराशेगा जौहरी 'मधु' कीमत बढ़ाएगा।


ये तय तुम्हें ही करना है बनना या बिखरना है,

समझ इसके इशारे तू बढ़... ये रुलाएगा नहीं।


श्रीमती माधुरी मिश्रा 'मधु'

12/04/21

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