इंसान

इंसानियत इंसान की पहचान है,  

वरना तो यारों कीड़े में भी जान है।  

सड़ती-गलती आत्मा जो ढो रहा,  

जीवित होकर भी वह मृतक समान है।


श्रीमती माधुरी मिश्रा 'मधु'

06/09/20


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