हिंदी दिवस

तू अंत है आगाज़ है,

तू मौन है आवाज़ है ।

ममतामयी आँचल है तू,

तू गीत है तू साज़ है।। 


मदमस्त सी निर्झर है तू,

गहरे सागर की लहर है तू।

भास्कर सी ओजस्वी है,

कभी चाँद सी शीतल है तू।।


तू अंतर्मन की अनकही है,

सब मिथ्या बस तू सही है।

'मधु' हृदय बसती है तू,

'हिंदी' तेरे बिन हिंद कुछ नहीं है।।


श्रीमती माधुरी मिश्रा

14/09/20


#हिंदी_दिवस_की_शुभकामनाएँ 


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